
नारी जो अपने
परिवार के लिए समर्पित होती है,
वह प्रेम और करुणा की मूर्ति होती है।
नारी शक्ति की देवी
सृजन की कामना होती है,
प्रेरणा की स्रोत लक्ष्य
प्राप्ति के लिए आगे बढ़ती है।
नारी एक अनमोल रत्न
विचारों व कल्पनाओं का भंडार होती है,
बच्चों को वह हरदम प्रेम से पालती है।
उसके हुनर से
पूरी दुनिया प्रभावित होती है,
वह संवेदनाओं का भंडार होती हैं।
विश्वास व सहानुभूति की
जीवनचर्या होती है,
हर कदम पर साहस रखती है।
बबिता कुमावत सहायक प्रोफेसर
राजकीय महाविद्यालय नीमकाथाना, सीकर